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Showing posts from March, 2020

RANDOM THOUGHTS

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Some of this are mine and others I read somewhere.

CALENDAR(ARTICLE ON CHANGING PHASE OF LIFE)

कभी कैलेंडर को गौर से देखने पर ये एहसास होता है, ना जाने इन आँखों ने कितने कैलेंडर के पलटते पन्नों को देखा होगा, कैलेंडर के महज पन्ने ही पलटते हैं, पर अपनी पूरी ज़िंदगी ही बदल जाती है। बच्चे से कब बड़े हो गए पता ही नहीं चला, कब माँ-बाप से दूर रहना सीख लिया, कब इतने बड़े हो गए कि भविष्य की सोचने लगे, और खुद को स्वतंत्र होने से रोकने लगे। हमने ज़िंदगी पर      खुद पाबंदी लगा दी है, कभी बारिश हो तो भीगने का मन नहीं करता, सर्दी ज़ुखाम की सोचने लगते हैं। कैलेंडर के बदलते पन्नों के साथ ज़िंदगी की तस्वीर ही बदल गई, ज़िंदगी भी क्या रंगीन हुआ करती थी जब मैंने कैलेंडर देखना सीखा था, अच्छे थे वो बचपन के दिन जब घड़ी देखना नहीं आता था, कम से कम समय की पाबंदी तो नहीं थी। जब घड़ी देखना माँ ने सीखाया था, तो बहुत खुशी हुई थी, घर में किसी को भी समय बताना हो तो मैं ही दौड़ता था, अब उसी माँ से जीभर कर बात करने के लिए घड़ी नहीं मिलती। ज़िंदगी अब ईट पत्थर से बने जंगल में सिमट कर रह गई है। वो भी क्या दिन थे जब पूरी गली अपनी थी। कभी कभी सोचता हूँ कि ये पूरी ज़िंदगी काग़ज़ में ही सिमट कर रह गयी है...

DEPRESSION(article on current situation of human being)

कभी आपने 90 km/hr से चल रही गाड़ी में अचानक से लगे डिस्क ब्रेक के झटके को महसूस किया है। इससे कही ज्यादा जोर का झटका लगता है जब हम इतनी तेज रफ़्तार से चल रही ज़िन्दगी में "डिप्रेशन" नामक लाइफ ब्रेकर से टकराते हैं। हमारी ज़िन्दगी तो चल रही होती है पर होती है "मरी हुई," "मुरझाई हुई," मर्ज फैलाने जैसी। समस्त ऊर्जा, आपकी शक्ति, तमाम इच्छाएँ, आपके सपने, आपकी खुद से उम्मीदें, आपका भरोसा, आपके हौसले, आपके बेहतरीन ज़िन्दगी की तमन्ना किसी छोटे से "मानसिक जाल" में तड़प रही होती है। माँ की आँखों का तारा, बाप के मजबूत कंधे, भाई की शक्ति, बहन का रक्षक, सब कहीं ज़िन्दगी से हारा हुआ लड़ रहा होता है। ना किसी से बात करने की चाहत, ना कोई जशन, न कोई उमंग, बस जीते हैं हम गाने भी "गिव मी सम सनशाइन गिव मी सम रे" की तरह का ही सुनते हैं। मन होता होगा कहने का कि "मैं कभी बतलाता नहीं पर अँधेरे से डरता हूँ मैं माँ," पर शक्ति इतनी छीन हो चुकी होती है कि क्या कहें, "ए ज़िन्दगी गले लगा ले मुझे" गाना सुन कर ही काम चला लेते हैं। हालत कुछ ऐसी होती है...

प्रियतम (POEM ON BELOVED)

तेरे कानों की बाली, तेरे आँखों के सुरमे,  तेरे होठों की लाली, तेरी खुली वो जुल्फे, तेरी काली सी कुर्ती, तेरी चमकती वो बिंदिया, तेरे पायल की छन-छन, तेरा चंचल चित मन, प्रियतम प्रियतम प्रियतम तुम लाज़वाब हो।   तेरे बातों में शरारत, तेरी नटखट सी आदत, तेरा मासूम सा चेहरा, तेरे शर्मीली वो अदाएं, तेरा मुड़ के मुझे देखना और देख के तेरा हँसना,   जो तू रो दे तो ज़ख्म, जो तू हँस तो मरहम, प्रियतम प्रियतम प्रियतम तुम लाज़वाब हो।   वो बारिश का मौसम और साथ तेरा प्रियतम  वो चाय की चुस्की, तेरे बचपन के किस्से  वो काली सी रात में हुई अनगिनत बात  वो सपनों की दुनियाँ ,वो खुशियों का दामन  प्रियतम प्रियतम प्रियतम तुम लाज़वाब हो।   तेरे  जाने  का गम , तेरी बेवफ़ाई  के  किस्से  तेरे  यादों  का सहारा , तेरे  दिये  सूखे  गुलाबों से  गुज़ारा  तेरे  सकल  की  इतनी  है  आदत  की  भीड़ में दिखे  तू  ही तू  आजकल  तुझे  फिर से ...

DASTAK(POEM ABOUT CORONA RISK AND PRECAUTION)

  दस्तक! दस्तक! दानव आया, है ये कितनो का हत्यारा । दबे पाँव चाल है इसकी, चुपके चुपके हर देश को आया। घुटने टेक दिए कितनो ने, फिर भी जाहिल जनता को समझ ना आया। सरकार ने फिर उपाय लगाया , मॉल ,कॉलेज,दफ्तर सब बंद करवाया। बुद्धू जनता फिर मौका पाकर,छुट्टी समझ मज़े खूब उड़ाया दानव ने फिर मौका पाकर,अपनी संख्या खूब बढ़ाया दस्तक! दस्तक! दानव आया। है चेतावनी! तुम्हे अभी भी, साबुन,मास्क सब खूब लगाओ। खासे,छींके कोई  बगल  तो मीटर  भर की दुरी बनाओ। घर का खाना ,घर का पीना, दाई  ,रसोइये पे पाबंद लगाओ। मिले जो कोई मित्र या साथी, हाथ "जोड़ " अभिवादन कर आओ, मिलेंगे हम फिर कल-परसो , पर पहले दस्तक  दानव के तो भगाओ। अगर किसी के पल्ले ये पड़ ना पाए ,  आंकड़े मृत्यु के उसे दिखाओ,  कोरोना महामारी  के संकट उसको बतलाओ इटली ,अमेरिका  में उसके दहसत दिखलाओ  । फिर भी जो वो करे तमाशा, फ़ौरन पुलिस को फ़ोन लगाओ। बोले जो कोई जाने को बाहर , कान के नीचे  तीन बजाओ।  और जो कोई फैलाए अफवाह , साइबर क्राइम केस लगाओ।...